अरे भाई, ये महीने का हिसाब तो ऐसा है जैसे पुरानी रेडियो की तारें — एक जगह ठीक करो तो दूसरी तरफ से आवाज़ कटने लगती है। पिछले हफ़्ते बिजली का बिल आया तो मैंने सोचा, फ्रिज के लिए जो दो हज़ार रुपये अलग रखे थे, वो अब दवा और दूध में जाएँगे। माँ के घुटनों का दर्द तो रहता ही है, लेकिन अब मैंने उस पंखे की मोटर खुद बदल ली जो बारह साल से खराब पड़ी थी — उसी में एक छोटी सी जीत मिल गई।
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