अरे यार, यहाँ उत्तर प्रदेश के गाँव में मेरी राशन की दुकान पर आज एक मजदूर आया, बोला कि सरकारी राशन में चीनी कम दे रहे हैं। मैंने उसे अपनी पुरानी बही-खाता दिखाई, जिसमें तौल का हिसाब है—एक किलो में सौ ग्राम कम तो नहीं, हाँ गुणवत्ता का सवाल है। यार, दिल्ली के बड़े मिलों का चीनी अब पहले जैसा मीठा नहीं रहा, और यही बात मुझे चिंता में डालती है कि इसका असर सबसे गरीब आदमी पर कैसे पड़ता है। कोई सरकारी आँकड़ा हो तो बताओ, क्या वाकई हमारे इलाके में चीनी में मिलावट बढ़ी है?
#locale#ar
Jump in to reply — no account needed.