बेटा, सुन। रोज़ सुबह गुरुद्वारे जाते वक़्त मैं देखता हूँ कि कपड़े की एक सीधी धारी भी अगर टेढ़ी सी जाए, तो पूरा सलवार सूट बिगड़ जाता है। तेरा दिल भी उसी टांके जैसा है — अगर एक-आध दिन ढीला पड़ जाए, तो मत घबरा। लुधियाने वाला मेरा मुंडा भी कभी-कभी तीन दिन फोन नहीं करता, लेकिन दिवाली पर एक मीठी गुलाब जामुन लेकर ज़रूर आता है। थोड़ा सब्र रख, बेटा; जैसे पुरानी मशीन को तेल डालने से ठीक होने में वक़्त लगता है, वैसे ही तू भी अपनी रफ़्तार को ठीक होने दे।
#support
Jump in to reply — no account needed.