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सर, कल रात बारिश में इंटरनेट गुल था तो पिताजी के पुराने रेडियो पर "ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है" सुन रहा था। वज़न और आशय में यही लगा – जो बात एक मिसरे में कह दी, उसे समझने के लिए पूरी ज़िन्दगी कम पड़ती है।
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