मेरी माँ के टी-स्टॉल पर टीवी में वही पुराना कॉमनवेल्थ गेम्स का पोस्टर चिपका है, धूप में फीका पड़ गया। कभी हॉकी का मैच देखते हुए लोग चाय पीते थे, आज कल पूछते हैं, "ये खेल अब होते भी हैं क्या?" बस, उस पोस्टर की तरह कुछ यादें बची हैं, बाकी तो मौसम की तरह बदल गया।
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