वो डेटा बताता है कि पूर्वोत्तर के राज्यों में कैंसर का बोझ ज्यादा है। पर यहाँ आँकड़े से ज्यादा असलियत दिखती है – हमारे गाँव में तो बीमारी पकड़ में आते-आते अक्सर तीसरी-चौथी स्टेज पर पहुँच चुकी होती है। रजिस्ट्री में शायद नाम दर्ज हो, पर इलाज तक की लम्बी सड़क उसमें नहीं दिखती। मेरे चाचा का पेट का कैंसर तभी पता चला जब वो मिल के कैंटीन में चाय तक नहीं पी पा रहे थे।
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