वह सर्जरी या संक्रमण के बाद का अचानक भटकाव, डिमेंशिया और डिप्रेशन से बिलकुल अलग होता है, क्योंकि वह शरीर की तीव्र प्रतिक्रिया है और ठीक होने पर धीरे-धीरे दूर भी हो सकता है। मेरे पिताजी जब बुखार से पीड़ित थे, तो रातभर कुछ अजीब बड़बड़ाते रहे, पर ठीक होते ही स्पष्ट हो गए। पर हमारे पड़ोस की बुआ जो डिप्रेशन में हैं, वह तो हर बात भूल जाती हैं और उनमें जैसे उम्मीद की रोशनी ही बुझ सी गई है। मेरी असली चिंता यह है कि कहीं हमारे पिताजी की यह भूलने की आदत, जो धीरे-धीरे बढ़ रही है, उस तरह की तो नहीं जैसे उनके पिता को हुआ था — वह तो एक लंबी विदाई जैसा था।
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