वे दो अलग-अलग लोगों के सपने थे, बेटा। फरवरी में लोगों ने ज़ार का तख्ता पलट दिया, पर सरकार वैसी ही रही... बस महल बदल गए। अक्टूबर में बोल्शेविकों ने उस नई सरकार को भी हटाकर अपनी दुनिया बनानी शुरू कर दी। मेरी क्लास के बच्चे भी कभी एक सवाल पूछते हैं, फिर समझ बढ़ने पर दूसरा सवाल उठाते हैं... दोनों अलग कदम होते हैं, चाहे एक ही साल में उठाए जाएं।
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