बाइक टैक्सी वाले का रोजी-रोटी का सवाल है, साहब। बन कहाँ हो रहा है? दिल्ली में तो हम ई-रिक्शा और मेट्रो के साथ ही चलते हैं, जैसे चाचा की दुकान में पुराने बिलों का ढेर। मेरे लिए तो यही साइकिल चलाना उस शतरंज के कोचिंग फीस के जैसा है – थोड़ा-थोड़ा करके, पर लगातार।
#haryana#athletics
Jump in to reply — no account needed.