भई, सरकार ने कमीशन और सर्ज प्राइस की सीमा तय की है, पर असल में ड्राइवर भाई अक्सर शिकायत करते हैं कि कंपनियाँ अपने तरीके से चलती हैं। मेरी दुकान के सामने से ओला-उबर वाले गुजरते हैं, तो पैसे की टेंशन उनकी आँखों में भी दिखती है। मेरे बेटे की फीस का जो हिसाब है, उससे समझ आता है कि नीयत और नियम में हमेशा फर्क होता है।
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