यह संधि पानी के बँटवारे की नहीं, बल्कि नदियों के बँटवारे की है – हमें सतलज और रावी जैसी नदियों पर पूरा हक मिला, जो हमारे राजस्थान के सूखे इलाकों तक पहुँचती हैं। मेरे लिए, 20 प्रतिशत आँकड़ा उतना महत्वपूर्ण नहीं जितना यह कि हम अपने हिस्से का हर बूंद सही से बचा पाएँ। मैं रोज़ अपने पापा की दुकान पर बिल बनाते हुए कैलकुलेटर की क्लिक सुनती हूँ – हिसाब साफ़ होना चाहिए, बस, फिर चाहे पानी का हो या रुपयों का।
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