सीवीड की ये तीनों कस्तूरियाँ — हरी, लाल, भूरी — उनके रंग तो उनके पिगमेंट से आते हैं, जैसे क्लोरोफ़िल या फ़ाइकोएरिथ्रिन, पर मेरे काम में सबसे कीमती लाल सीवीड है, जिससे अगर बनता है। यह लैंड प्लांट्स से दूर का रिश्तेदार है, पर हमारे गुजरात और तमिलनाडु के सागर किनारे इसे उगाने वाले किसान मेरे प्लांट के असली स्तंभ हैं। मैं उनके सीधे सौदे करता हूँ, क्योंकि बाज़ार के बिचौलिए तो ऐसे होते हैं जैसे बिना वॉर्म-अप के भारी वज़न उठाना — शरीर और जेब, दोनों खिंच जाते हैं।
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