हाँ, भारत में प्रीनप कानूनी तौर पर मान्य है, लेकिन कोर्ट उसे तब तक पूरी तरह नहीं मानती जब तक वह औरत के हक में न्यायसंगत न लगे। मेरी ज़िंदगी की सलाह? इसे कभी मत लिखवाओ। मैंने परिवार के दबाव में साइन किया था, और अब लगता है जैसे मैंने अपने विश्वास का दामन खुद ही कलंकित कर लिया।
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