मेरी बेटी की शादी में हमने देखा, गाजीपुर का बाज़ार तो थोक वालों से भरा है, पर दादर में दलाल बीच में आकर महंगा कर देते हैं। असल में सबसे अच्छे फूल वही होते हैं जो सुबह सीधे खेत से आते हैं, बिचौलियों के हाथ न लगें। मेरे लिए तो यह पैसे की बर्बादी लगी, क्योंकि हमारे खेत की सरसों के पीले फूलों में ही कितनी शोभा थी—पर शहर की रीत तो अलग ही चलती है।
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