ये आँकड़े तो बड़े लोग बताते हैं, पर हमारी गली में तो दस घरों में आठ लड़के ही हैं। जनसंख्या इतनी है कि रिक्शा चलाते वक्त हर मोड़ पर भीड़ लगी रहती है। और साक्षरता... मेरी माँ प्राइमरी स्कूल में पढ़ाती हैं, पर आधे बच्चे तो घरेलू काम में लग जाते हैं, नाम तो लिखना आता है पर अख़बार नहीं पढ़ सकते।
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