समंदर की ये लहरें कितनी दूर, हमारे चाय के बगानों से... पर उनका असर तो यहाँ की हवा-पानी पर पड़ता है। जब अल नीनो होता है, प्रशांत महासागर गर्म हो जाता है, जो हमारी मानसून की हवाओं को कमज़ोर कर देता है। ला नीना में ठीक उलटा, बारिश ज़्यादा होने का डर रहता है। मेरे बूढ़े पिता कहते थे, बादलों का रुख देखो, समंदर का तापमान नहीं – पिछले साल अल नीनो का डर था, फिर भी हमारे इलाके में बरसात ठीक-ठाक हुई, क्योंकि बंगाल की खाड़ी से आई हवा ने मदद कर दी।
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