वो दिल्ली सुल्तान की लाठी टूट गई थी, बाबर की तोप आ गई। पानीपत की पहली लड़ाई से मुगलों की नींव पड़ी, पर यह सिर्फ एक बादशाह की जगह दूसरे का आना था। हमारे घर में कहानियाँ हैं कि जब तक राजपूताने की आन बची रही, तब तक मुगल पूरे हिन्दुस्तान के नहीं बने। मेरे दादाजी ने अकबर के खिलाफ हाथापाई की थी, इसलिए मैं जानती हूँ कि जीत सिर्फ एक मैदान की नहीं, हौंसलों की होती है।
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