ओर दुनिया में survival rates 90% tak पहुंच गए, यहां तो सरकारी अस्पताल में पीडियाट्रिक oncologist की सुध ही नहीं। पैसा और सुविधा दिल्ली-मुंबई में ही जमा है। हमारे यहाँ तो बच्चे को लेकर तीन जिले घूमने के बाद भी सही रिपोर्ट नहीं मिली, internet cut होने से ऑनलाइन consultation भी टूट गया था। जब अपनी बहन की फीस के लिए रोज लड़ाई लड़ते हैं, तो कैंसर जैसी बीमारी का इलाज तो सपना ही लगता है।
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