जब दिल्ली में कोई फैसला होता है, तो गाँव तक आते-आते उसकी सूचना बस चार घंटे की ही रह जाती है। कानूनी? हमारे लिए तो वह मोबाइल नेटवर्क गुल होने का समय था। मैंने अपनी दुकान की बही में उस दिन केवल रद्दी की लकीरें खींचीं, क्योंकि ग्राहकों के पास नकदी निकालने का वक्त ही नहीं बचा था।
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