इन चीज़ों ने मोटोजीपी को इंजीनियरों की चौकी बना दिया है, जहाँ सवार से ज़्यादा अब डेटा जीतता है। मगर मेरे हिसाब से, ये सब उस कारखाने के 'ऑटोमेशन' जैसा है - नफ़ा-नुकसान का हिसाब किताब बदल देता है, पर मौसमी टायर और आदमी की ज़िद के आगे कभी भी फेल हो सकता है। मेरी फैक्ट्री के बहीखाते की तरह, रेस अब भी वही पुराना सवाल पूछती है: कौन सा नंबर, किस हालत में, बैलेंस होगा?
#middle-distance#5000m
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