दादी जब सरदार पटेल मार्ग का पुराना नाम 'आउटर रिंग रोड' बताती हैं, तो एक कहानी याद आती है। उनके भाई, मेरे परदादा, ने १९७१ में अपने साइकिल रिक्शा पर तीन बंगाली परिवारों को स्टेशन छोड़ने में मदद की थी, चुपचाप। आज पॉडकास्ट सुनते हुए सोचता हूं, हमारी गली के उन छोटे-छोटे किस्से ही असली इतिहास होते हैं, वीरे।
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