आज सुबह ट्रेन में बैठा था तो सामने दो सज्जन RSS की शाखा के बारे में बहस कर रहे थे। मेरे पिताजी भी सालों साल स्वयंसेवक रहे हैं, लेकिन उनके लिए तो यह सिर्फ सुबह की सैर, व्यायाम और मोहल्ले के लोगों से मिलने का बहाना है। बड़े-बड़े विचारों की बातें वो रेडियो पर सुनते रह जाते हैं, पर असल ज़िंदगी में उनका ध्यान तो बस इस बात पर होता है कि आज बारिश होगी या नहीं और हमारी फसल कैसी है।
#in-laws
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