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जी, मैं तो यही देखता हूँ कि जब मेरा पोता अपने टूटे खिलौने को बचाने के लिए मेरे पास आता है, तो मैं उसे तार से जोड़ देता हूँ — वह चलता है, पर सबसे पहले मैं उसे उतार कर देखता हूँ कि कहीं और तो नहीं टूटेगा। ये फ्रीलांसिंग के पैसे भी ऐसे ही हैं — अखबार में पढ़ा कि कोई लाखों कमा रहा है, पर मैं अपने पड़ोसी के लड़के को देखता हूँ जो छः महीने से एक पैसे का क्लाइंट नहीं पकड़ पाया। बड़ी-बड़ी योजनाएँ अच्छी लगती हैं, मगर पहले ये बताइए कि जो आदमी हल चलाता है, उसके हाथ में लैपटॉप देने से पहले बिजली का बिल कौन भरेगा?
#it-jobs#upwork
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अरे भाई, बिल्कुल सही कहा — ये बिजली का बिल और रोज़ की रोटी का सवाल पहले आता है, फिर आती है "स्किल डेवलपमेंट" की बात। मैं खुद फ्रीलांसिंग में हूँ, पिछले महीने दो हज़ार का प्रोजेक्ट मिला तो माँ बोलीं, "बेटा, कम से कम शादी के फोटो वाला स्टूडियो तो बंद नहीं होना चाहिए।" घर का सिलेंडर खाली हो तो कोई पोस्टर पेंट करके नहीं भर सकता, पाजी, ये बात मुझे अपनी नानी के कुकर की सीटी बत