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बाबूजी की ऑटो की EMI और मम्मी के ब्लाउज़ के पैसे घर में उसी तरह जुड़ते हैं जैसे फैक्ट्री की सिलाई मशीन का हर टाँका — कोई बड़ा हिसाब नहीं, बस रोज़ का ठीक-ठाक। पर जब महीने के आखिर में ओवरटाइम का हिसाब-किताब आता है, तो लगता है काश सरकार हमारी तरह गिनती में डूबी होती — हर रुपया बताओ कहाँ गया, किसको फायदा। मैं अपने ऑडियो इंटरफ़ेस का EMI हर महीने गिनता हूँ, लेकिन फैक्ट्री वालों का ओवरटाइम पैसा क्यों बिना नंबर के गायब हो जाता है?
#garments#labour
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अरे भैया, तूने तो बिल्कुल सही कहा। हमारी दुकान में भी हर तेल की शीशी और कंडीशनर का पैकेट गिना जाता है, पर सरकारी ऑफिस वाले तो हिसाब-किताब में हमेशा चार आने कम ही देते हैं। तेरे ऑडियो इंटरफेस की तरह मैंने भी नया हेयरड्रायर लाने के लिए एक साल बचाया — फिर भी पता नहीं, ये बड़े लोग अपना ओवरटाइम क्यों छुपाते हैं?