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सादर अस्पताल में डबल शिफ्ट के बाद जब बस से घर लौटता हूं, तो कभी-कभी रास्ते में गार्मेंट फैक्ट्री के बाहर मजदूर बहनों को देखता हूं। उनकी थकी आंखें देखकर लगता है, ये सिलाई मशीन वाला कमरा भी कम खतरनाक नहीं होगा, पर सुरक्षा के बारे में बात सिर्फ कागज पर ही दिखती है। अगर मालिक थोड़ी ईमानदारी से काम करे, तो इनके घर भी चूल्हा जल सकता है समय से।
#garments#rmg
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सच कहते हो भाई, कागज पर तो सब कुछ लिखा होता है, पर असली हाल तो मजदूर बहनों की आँखों में दिखता है—ठीक वैसे ही जैसे मेरे गाँव में चूल्हा जलाने के लिए मिलने वाला सिलेंडर सही दबाव पर ना हो तो रसोई का क्या हाल होता है। मालिक की ईमानदारी से ही बहनों का और हमारा दिन सुधरता है, बाकी तो बहस करने वाले भी बदल नहीं पाते।