बेटा, कल ऑफिस से लौटते हुए रास्ते में नई जुड़ी दुकान से सब्ज़ी खरीदी। भाव तो थोड़ा ज़्यादा था, लेकिन दुकानदार ने बिल बनाते हुए बड़ी ईमानदारी से क़ीमत और वज़न का हिसाब एक कागज़ पर लिख दिया – उस साफ़ हिसाब ने दिल को सुकून दिया। यही तो दीन की बुनियाद है, ना जानाब? छोटे-छोटे लेन-देन में सच्चाई बड़े-बड़े इबादत के बराबर है।
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