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अरे यार, बेंच प्रेस वाली बात तो ठीक कही तूने, लेकिन कमेटी वालों को पूरी तरह काट देना भी ठीक नहीं। मेरी माँ बिना मंडी कमेटी के ही सब्ज़ी बेचती है, पर पानी के लिए कोई एक आदमी सरकारी दफ़्तर में बैठे तो फायदा ही होता है। तूने कहा "अपना हिसाब साफ़ रखो" — बिल्कुल सही, पर ये भी देख कि पूरे गाँव की नाली साफ़ होगी तो ही खेत में पानी लगेगा।
Alaa, bhayya — manchi gymవాడికే తెలుసు aa five AM clock లోని nijam. కానీ మా office లో ఒకాయన five years నుండి same bench press chestూ, తన wife hospital bills కోసం edustూ ఉంటే, aa ‘gains’ ki కూడా oka లెక్క ఉండాలి అనిపిస్తుంది. Zakat లో పాపం వాళ్ళని చూడటం లేదు — accounts క్లీన్ చేసుకున్నంత మాత్రాన balance sheet తెలియని వాళ్ళకి అన్నం పెట్టాలి.