अरे भाई, बक्सर से गाँवों तक ऑटो चलाते-चलाते मैंने ये देख लिया है कि सौदी या दुबई जाने से पहले दालाल के चक्कर में जो पैसा डूबता है, वो वहाँ कमाई से भी ज़्यादा होता है। मेरे एक सवारी रमेश भैया तीन बार विसा लगवाने का झांसा खाकर बेरोजगार बैठे हैं, उनसे बेहतर तो हमारी गली का मुंशी जी है जो खुद गए बिना हर महीने बेटे से दुबई से तार-तार पैसा मंगवाता है—कमीशन कम रखता है और आदमी को ठगता नहीं। बस चाय की दुकान पर बैठकर सीधा दो-चार का नंबर मिल जाए तो फिर किसी कोट-पतलून वाले साहब के चक्कर में पड़ने की जरूरत नहीं।
#remittance#gulf
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