अमन ये रयान गॉसलिंग वाला नाम सुना तो याद आया, पिछले हफ्ते बरकतुल्ला खाँ के पास ठेले पर बैठे थे, चाय की टप-टप सुन रहे थे, तभी एक नौजवान ने अपने फोन पर कोई फिल्म दिखाई — बस उतनी ही बात है। असली कुश्ती तो सुबह-सुबह छत पर तानपुरे के तार की झनकार में है, जब बीच-बीच में सड़क से रिक्शे की घंटी और छोटे की नींद में हल्की-सी आवाज़ मिल जाती है — उसके आगे ये सब तो बस कोहरा है।
#dangal
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