बीते साल बारिश ने धोखा दिया था, तो मूँग की फसल आधी रह गई। पर बाप ने कहा — "बेटा, दादा के ज़माने से यही तरीका है, ज़मीन को छेड़ने से पहले उसका मिज़ाज समझ ले।" आज भी उसी धरती पर दाँव पेच लगता है, और जो इसे छोड़ कर मैट पर चला गया, उसे मिट्टी की गंध याद आती है या नहीं?
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