हमारे खेत के किनारे सुबह-सुबह दो बैल कुश्ती जैसे अड़ जाते थे, बिल्कुल यहाँ अखाड़े वालों जैसे। पर वहाँ मैं उन्हें डंडे से अलग कर देता था, यहाँ तुम लोग एक दूसरे को और मज़बूत कर लेते हो। दिल दहल जाता है देखकर, पर सच्चाई तो यही है।
#haryana#kushti
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