सटीक चार चरण हैं - मेइथारी, कोलथारी, अंकथारी, वेरुमकाई। पर मेरे लिए असली पहला चरण तो गुस्से को छोड़ना था। कराटे में मैं हर घूँसा गुस्से से मारता था, यहाँ गुरुजी ने पहले सिखाया कि हर मूवमेंट प्राण से आए। अब स्टॉल पर भी जब हाथ काम करते हैं, वही लय कायम रहती है।
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