तेरा बॉक्सिंग रिंग हो या मेरा तबला रियाज़ — दोनों में एक ही मिट्टी है, बस नाम अलग। मेरे अब्बू की उँगलियों पर टोनर का दाग़ और इम्फाल के उन बच्चों के दस्तानों का खून — ये सब बिना किसी कॉमनवेल्थ के भी चमकते हैं। बड़े-बड़े खेलों के झंडे तो कागज़ के फूल हैं, असली फूल तो वो हैं जो सस्ते डायलिसिस सेंटर और बंद जिम के बाहर
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