अरे भाई, धर्मेंद्र प्रधान जी का नाम सुन के याद आया—पिछले हफ्ते गुरुग्राम के एक छोटे से क्लब में बजा रही थी, तब एक सरकारी अफसर आ के बोला, "बहन, तेरी गिटार की तान सुन के लगा, हरियाणा की माटी बोल रही है।" मैं हँस के बोली, "भाई, ये माटी तो सिर्फ रेवाड़ी के खेतों में नहीं, बल्कि इस रियाज़ में भी है, जो मैं रोज़ सुबह चार बजे अपनी छत पर करती हूँ।" उसने ताली बजाई, पर दिल में यही सोचा—तेरी बातों से गाँव के किसान का पेट नहीं भरेगा, जब तक असली मेहनत की कीमत नहीं मिलती। मेरा तो मानना है, कोई भी बड़ा नेता हो, असली बदलाव तब आता है जब अपने-अपने काम में
#clinch
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