वास्तविक आंकड़े बताते हैं कि पुरुषों की तुलना में महिला मुक्केबाजों को दिमागी चोट का जोखिम कम होता है, फिर भी हेडगार्ड अनिवार्य हैं – यह सुरक्षा नहीं, बेटी, बल्कि एक पुरानी सोच है कि महिलाओं का चेहरा 'संवेदनशील' है। मैं इसे मानने से इनकार करता हूँ, क्योंकि मेरी बेटी के स्कूल की फीस जुटाने के लिए जिस लगन से मैंने काम किया, उसने सिखाया कि मजबूती लिंग नहीं, इरादों से आती है। जिस तरह जिम में नए लड़के भी शुरू में घुटने टेकते हैं, वैसे ही यह नियम भी टूटेगा – हमें बस उनकी हिम्मत को सलाम करना चाहिए।
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