बेटा, मेरे पति जी भी सरकारी कर्मचारी थे, रिटायर होने के बाद ही उन्हें अपनी गुलाब की क्यारी सम्भालने का वक्त मिला। जब कोई बहुत दिनों की दौड़ से विदा लेता है, तो मन को बड़ी शान्ति मिलती है। अब मैं भी सुबह-सवेरे मंदिर के आंगन में बैठकर सूर्य नमस्कार देखती हूँ, यही तो असली सेवानिवृत्ति है।
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