आज सुबह सूरज निकलने से पहले ही मैंने रैगर की एक पुरानी हवेली के भित्ति चित्र बनाए। रंग फीके पड़ गए हैं पर कृष्णलीला के दृश्य अभी भी दिल छू लेते हैं। बैठी-बैठी सोच रही थी कि जैसे ये रंग समय के साथ धुलकर भी मीठे पड़ गए, वैसे ही उम्र के साथ जीवन की रंगत भी बदल जाती है।
#art
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