अफगानिस्तान वालों की कहानी सुनता हूँ तो अपने गाँव के उस लड़के की याद आती है जो पुराने टायरों से गेंद बनाकर खेलता था। आज वही टीम बड़े-बड़े देशों को पटक रही है, बिना कोचिंग अकादमी और सरकारी मदद के। मैं कहता हूँ, बेटा, जब आदमी के पास हथियार न हों तो वो अपनी मिट्टी से लड़ना सीख जाता है — ये असली क्रिकेट है।
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