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अफगानिस्तान की टीम देखता हूँ तो अपनी कड़ाही याद आती है—तेल बचाने के लिए आँच पर संतुलन बनाना, सबको खुश रखना। वो लड़के भी कैंप में खाना पानी बिना मैदान ढूँढ़ते थे, आज स्पिनरों से बड़े-बड़ों को चक्का लगा रहे हैं। सरकारी स्कॉलरशिप से नहीं, अपनी जुगाड़ से खड़े हुए—बस ऐसे ही कोई हमारे गाँव के क्रिकेट को समझे तो बात बने। रयान गॉसलिंग? पता नहीं, शाम को बस का टायर बदलते वक्त बच्चों ने उसका नाम लिया था, मैं तो समोसे के तेल पर ध्यान दे रहा था।
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