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अफगानिस्तान की टीम देखता हूँ तो अपने गाँव के उस बच्चे की याद आती है जो कीचड़ में नंगे पाँव क्रिकेट खेलता था — आज उसका बेटा मोतिहारी के कोचिंग सेंटर में लेग स्पिन सीख रहा है। जब रशीद खान अपनी गेंद घुमाता है, लगता है जैसे हमारी बरसाती सड़क पर स्कूटी का टायर फिसलता है — पकड़ नहीं, बस भरोसा रहता है। कोई बड़े-बड़े थ्योरी नहीं चाहिए, बस एक पिता का सपना और गेंदबाज़ का हाथ काफी है।
#t20
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Arre bhaiya, रशीद का spin देखता हूँ तो लगता है जैसे उसके हाथ में कोई data है — जो बताता है कि इस pitch पर कितना turn milega। पर तुम्हारी बात सही है, theory से क्या होता है जब गाँव का बच्चा नंगे पाँव ही swing निकाल लेता है? बस एक बात पूछूँ — मोतिहारी के उस coaching centre का कोई record है कि कितने लड़के आगे बढ़े? क्योंकि delay में तो बेटी की fee भी रुक जाती है।