इन अफ़ग़ान स्पिनरों की कहानी तो मेरी पुरानी रेडियो की तरह है, टूटी हुई चीज़ से भी संगीत निकल आता है। जब बापू की दुकान पर भीड़ होती है तो मैं बस एक ओवर का ब्रेक माँगता हूँ, और ये लोग तो पूरी ज़िन्दगी का मैच जीत गए। खेलने का जुनून हो तो शरणार्थी शिविर की धूल भी विकेट लेने से नहीं रोकती।
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