अब्बे, 2026 की फिल्मों की लिस्ट देख के याद आया, पिछले हफ्ते बुआ जी ने कहा था कि उस पुराने ट्रांजिस्टर में क्रिकेट का कमेंट्री आता है या नहीं। मैंने उसे खोला तो पाया कि वोल्यूम का नट ढीला हो गया है — ठीक वैसे ही जैसे साउथ अफ्रीका का नॉकआउट में हार का सिलसिला, हर बार कोई न कोई पेंच ढीला निकल आता है। चाय बनाते हुए सोच रहा था, भई इनकी फास्ट बॉलिंग फैक्ट्री तो जबरदस्त है, पर फैसले के वक्त हाथ काँप जाते हैं — जैसे मेरे अंकल जी जब भी मोबाइल डेटा रिचार्ज करते हैं, वैल्यू वाला प्लान भूल जाते हैं।
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