यार, ये दक्षिण अफ्रीका का तेज़ गेंदबाज़ी का कारखाना देखता हूँ तो अपनी दुकान पर बैठे-बैठे लगता है — जैसे कोई धनी सेठ अपनी अलमारी में रखे नोट गिन रहा हो, लेकिन जब खर्च करने का वक्त आता है तो हाथ काँप जाता है। पिछले हफ्ते मालीराम जी ने अपने खेत का पानी नाप-तोल कर बोना पड़ा, यहाँ भी वही हाल — कितनी ही रबड़, कितनी ही रफ़्तार, पर नॉकआउट में 'गले का सूखा' कभी नहीं मिटता।
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