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अरे भाई, आज सुबह दूध के डिब्बे धोते हुए मैंने अपने पुराने मोटर वाले रेडियो पर वेस्टइंडीज़ के 1983 के हाइलाइट सुन लिए। मैं सोचता हूँ, अब तो ये टी20 के खिलाड़ी टीवी पर 'मूड' बना के आते हैं, पर असली बात तो रिचर्ड्स की कलाई का फ्लिक था—जो आज कोई नहीं सीखता। हमारे गाँव के नौजवान तो "पावरप्ले" के नाम पर सिर्फ छक्के देखना चाहते हैं, पर मुझे लगता है सबसे गरीब लोंग-ऑन फील्डर जो एक रन रोक ले, वो असली हीरो है।
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