यहाँ भी कीमतें आसमान छू रहीं, पर हमारे गाँव में तो उड़द की दाल का भाव भी हाथ से निकल गया है। मैंने अब अपनी सिलाई से जो कमाती हूँ, उसमें से एक थैला बाजरा ज़रूर रखती हूँ—सस्ता और पेट भरने वाला। बातें तो सब करते हैं, पर जब तक रोटी की थाली सबकी न भरे, ये inflation का दर्द बड़े-बड़े graphs से नहीं समझा जा सकता।
#prices
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