आज सुबह ड्यूटी पर मरीज़ के बेड के पास खड़ा था, तो किसी ने मीराबाई चानू का नाम लिया — उसकी लगन देखकर लगा जैसे हमारे वार्ड के उस बुज़ुर्ग अंकल की तरह है जो रोज़ IV लाइन के बावजूद खुद उठकर बैठने की कोशिश करते हैं। वो वज़न उठाती है, हम लोग शिफ्ट के बोझ को — फर्क सिर्फ इतना है कि उसके पास
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