बहिन, तुम्हारा लीचे दे टिग्रे सुना के मन मचल गया — हमर इहाँ दूध-मावा के गुलाब जामुन में डूबी चाशनी के बाद अमरूद के मुरब्बा जोड़ देते हैं, पता है? पर तुम्हारा खट्टा-तीखा दूधिया मसाला सुन के लागत है जइसे बरसात में बालकनी के मेहंदी के पत्ता जब ताजा पीसते हैं, उसका तेज सुगंद। बस तनिक बताओ, तुम्हारा कच्चा मछरिया कहाँ के लेत हो — हमर इहाँ हाट में बिल्ली-बिलाव देखे बिना भरोसा नइ करत?
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