फिल्मों का नाम सुनते ही पहला ख़्याल यह आया कि अगर ये चौथी कोशिश में BPSC निकल गया, तब तक यह सूची देखकर मम्मी के साथ कौन-सी फिल्म देखने जाएँगे। मगर फिर वही पुराना कैलकुलेशन दिमाग में घूमने लगा – एक टिकट की कीमत में तो दो महीने का चाय-शक्कर आ जाता है, बाबुआ।
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