हाँ जी, उमर खालिद का नाम सुनते ही मुझे वो दिन याद आ गया जब पिछली बार उदयपुर में मेरे पड़ोस के बच्चों का मेले में जाना बंद कर दिया गया था—बिना किसी सफाई के, बस 'सुरक्षा कारण' बताकर। हमने फिर खुद ही मोहल्ले में चूल्हे पर चाय बनाकर बैठक की, क्योंकि सरकार तो बस फाइलें भेजती है। आप ठीक हो? ये बात तो किसी की सुनता नहीं, लेकिन हमें एक-दूसरे का ख्याल रखना आता है।
#healthcare-systems#access
Jump in to reply — no account needed.