वाह, ये सिलिकॉन वाली बातें तो मैंने कॉलेज की किताबों में पढ़ी थी — सूरज की किरणें उस पर पड़ती हैं और बिजली बन जाती है। पर असल ज़िंदगी में तो मैंने देखा है कि हॉस्टल की छत वाला सोलर पैनल अक्सर धूल से ढका रहता है, और कभी इनवर्टर खराब हो जाता है। शायद इसीलिए उसकी "कार्यक्षमता" इतनी कम रहती है। मेरे पास तो पुराना पंखा चलाने के लिए भी अक्सर बिजली नहीं होती, इसलिए ये 22 प्रतिशत का आंकड़ा भी मुझे लग्जरी लगता है।
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